सुस्त मांग के चलते मंडियों में मक्का बाजार सीमित दायरे में

देश के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मक्का बाजार इस समय मिश्रित लेकिन कुल मिलाकर सुस्त रुख दिखा रहा है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात की मंडियों से मिले ताजा भाव संकेत बताते हैं कि बाजार एक संकरे दायरे में फंसा हुआ है और किसी स्पष्ट दिशा के अभाव में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। महाराष्ट्र में भाव स्थिर रहे। गोकक में मक्का ₹1,960, मिरज (सह्याद्री स्टार्च) में ₹1,900 और सांगली में ₹2,075 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। राजस्थान में जोधपुर मंडी में भाव ₹1,990 प्रति क्विंटल पर टिके रहे। इससे संकेत मिलता है कि प्रोसेसिंग और औद्योगिक मांग से कुछ समर्थन मिल रहा है, हालांकि यह तेजी का मजबूत आधार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। मध्य प्रदेश में स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही। गंजबासोदा में भाव ₹1,320 से ₹1,716 प्रति क्विंटल के बीच रहे, जिसमें ₹61 की मामूली बढ़त दर्ज की गई। यह शॉर्ट कवरिंग और सीमित खरीदारी का संकेत देता है। वहीं सीहोर और धामनोद जैसी मंडियों में व्यापक दायरे के बावजूद भाव दबाव में रहे। लगातार आवक और पर्याप्त स्टॉक के कारण खरीदार आक्रामक खरीद से दूर रहे। गुजरात में गोंडल मंडी में मक्का के भाव ₹50 टूटकर ₹1,905 से ₹2,005 प्रति क्विंटल के दायरे में रहे। वहीं दाहोद में बिल्टी रेट ₹2,150 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए, जो गुणवत्ता और डिलीवरी आधारित मांग को दर्शाता है। कुछ औद्योगिक और पोल्ट्री से जुड़े केंद्रों पर हल्का सुधार देखा गया, लेकिन इससे समग्र बाजार धारणा में कोई खास बदलाव नहीं आया। खरगोन और पूर्वी निमाड़ क्षेत्र में मक्का के भाव ₹1,510 से ₹1,700 प्रति क्विंटल के दायरे में स्थिर रहे। आज फिर से आवक बढ़ी, जहां लगभग 200-250 वाहनों की आवक दर्ज की गई। अधिक आवक के चलते बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी हुई है, जबकि मांग अब भी कमजोर बनी हुई है। वर्तमान में मक्का बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर निर्यात गतिविधि और सुस्त घरेलू मांग है। एथेनॉल, स्टार्च और पोल्ट्री फीड जैसे प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्र केवल जरूरत के आधार पर ही खरीदारी कर रहे हैं। जब तक इन क्षेत्रों से स्थायी और मजबूत मांग नहीं उभरती, तब तक मक्का के भावों में तेज सुधार की संभावना कम ही नजर आ रही है।

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