तूर बाजार में फिर तेजी के संकेत, भाव ₹8,600 तक पहुंचने की संभावना

सट्टा बिकवाली और ऊँचे भाव पर मुनाफावसूली के कारण तूर के भाव पखवाड़े भर में ₹700 प्रति क्विंटल तक गिर गए थे। इसके बाद आज दाल मिलों द्वारा निचले स्तर पर खरीदारी शुरू होने से बाजार में ₹250 की तेजी दर्ज की गई। आगे स्टॉक की कमी को देखते हुए भाव फिर से ₹8,600 प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हैं। रंगून में पिछले पखवाड़े के दौरान कीमतों में $30-35 प्रति टन की गिरावट आकर भाव $880-885 प्रति टन रह गए थे। हालांकि इन स्तरों पर पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं होने के कारण आयातकों ने चेन्नई और दिल्ली में फिर से ऊँचे भाव बताने शुरू कर दिए हैं। आयात महंगा पड़ने और नई फसल का उत्पादन अनुमान से कम रहने के कारण बाजार का रुख आगे तेज दिखाई दे रहा है। इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में खरीफ सीजन की तूर की आवक जारी है, लेकिन रबी सीजन में बुवाई का रकबा दिन-प्रतिदिन काफी घट रहा है। इस वर्ष खरीफ और रबी दोनों सीजन मिलाकर कुल उत्पादन 37-38 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 54-55 लाख मीट्रिक टन था। गौरतलब है कि बुवाई के समय से ही महाराष्ट्र के अकोला, जालगांव, जालना, बुढलाडा तथा कर्नाटक के काली कोठी-गुलबर्गा क्षेत्र में लगातार बारिश से बोई गई फसल को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी बारिश से फसल को व्यापक क्षति पहुंची। नीमच-कटनी क्षेत्र में भी इसी प्रकार की स्थिति रही। बिहार और झारखंड में भी फसल का काफी नुकसान हुआ है। दूसरी ओर, इस वर्ष तूर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ₹450 की बढ़ोतरी कर इसे ₹8,000 प्रति क्विंटल कर दिया है। कर्नाटक में MSP पर अच्छी मात्रा में खरीद भी हो चुकी है। यहां लेमन तूर की कीमत कम आवक और चेन्नई से मिल रही तेजी की खबरों के कारण आज ₹7,700 प्रति क्विंटल बोली जा रही है। अधिकांश व्यापारियों ने हाजिर सौदों के बजाय फरवरी-मार्च डिलीवरी के लिए चेन्नई के साथ सौदे करना अधिक पसंद किया है, जिससे स्थानीय पाइपलाइन में स्टॉक की उपलब्धता कम हो गई है।

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