मौसम की खबरों से सरसों बाजार में हल्की राहत लेकिन गिरावट का रुख बरकरार

सरसों बाजार में नई आवक बढ़ने के बाद जैसा अनुमान था, वैसे ही भावों में दबाव बना रहा। हालांकि बुधवार को कई दिनों की गिरावट के बाद बाजार ने हल्की राहत दिखाई और मामूली मजबूती के साथ बंद हुआ। जयपुर में भाव ₹50 बढ़कर 6800 रुपये रहे, भरतपुर 6400, चरखी दादरी 6725, सुमेरपुर 6650, टोंक 6430 और दिल्ली 6600 पर बाजार संतुलित रहा। सलोनी प्लांट में भी ₹50 की तेजी के साथ भाव 7200 तक पहुंचे। अन्य प्लांटों में गोयल कोटा 6600, आगरा बीपी 7100 और आगरा शारदा 7000 के आसपास कारोबार हुआ। पिछले कुछ दिनों से बढ़ती आवक के कारण बाजार पर दबाव था और आवक बढ़े तो भाव झुके की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन अचानक मौसम में बदलाव ने माहौल को प्रभावित किया। जयपुर, नागौर और सीकर सहित कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की खबरों ने संभावित फसल नुकसान की आशंका पैदा की, जिससे खरीदारों ने सीमित खरीद बढ़ाई और बाजार में 50–100 रुपये की तेजी देखने को मिली। हालांकि इस तेजी को टिकाऊ नहीं माना जा रहा। सरसों तेल में भी दबाव बना रहा। कच्ची घानी का भाव भरतपुर में 1390, जयपुर में 1368 (संभावित संशोधन) और दिल्ली में एक्सपेलर 1390 रुपये प्रति 10 किलो रहा। सरसों खल में जयपुर में 55 रुपये की तेजी के साथ भाव 2680 पहुंचा, जबकि भरतपुर में 20 रुपये गिरकर 2750 और सुमेरपुर में 31 रुपये गिरकर 2630 रुपये प्रति क्विंटल रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंडोनेशिया के बी45 मैनडेट की चर्चा से पाम तेल को समर्थन मिला और ईरान-अमेरिका तनाव के कारण क्रूड में हलचल रही, जिसका असर घरेलू तेल बाजार पर भी पड़ा। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर न तो आवक में कमी आई है और न ही वास्तविक माल की कमी की पुष्टि हुई है। 7000 रुपये के नीचे बाजार में कमजोरी का संकेत पहले से स्पष्ट था और मौजूदा ढांचा अभी भी बरकरार है। कुल मिलाकर वर्तमान सुधार को 50–100 रुपये की अस्थायी तेजी माना जा रहा है। यदि एक-दो दिन तेजी बनी रहती है, तो यह स्टॉक निकालने का अवसर हो सकता है, क्योंकि आगे फिर से दबाव बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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