डीओसी में गिरावट के बाद बाजार संभला, आगे तेजी के संकेत
सोयाबीन के कम उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोया डीओसी (डिऑयल्ड केक) के ऊंचे दामों के कारण चालू सीजन में अब तक बाजार 45-50% तक बढ़ चुके थे। हाल ही में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे प्लांट पहुंच भाव घटकर 5400-5500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। मंडियों में सोयाबीन की आवक भी कम हो गई है, ऐसे में मौजूदा स्तरों पर खरीद लाभदायक मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोया डीओसी के दाम नरम पड़ने से घरेलू बाजार में भी लगभग 1000 रुपये प्रति टन की गिरावट आई है। वर्तमान में कोटा लाइन में डीओसी के भाव करीब 40,000 रुपये प्रति टन और नीमच-दतिया-सुजालपुर लाइन में 39,000-39,200 रुपये प्रति टन चल रहे हैं। पिछले पखवाड़े में सोयाबीन के भाव विभिन्न प्लांटों में 59-61 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे थे, जो अब घटकर लगभग 55 रुपये प्रति किलो (करीब 5500 रुपये प्रति क्विंटल) रह गए हैं। इसी अवधि में डीओसी के दाम भी ऊपरी स्तर से करीब 4000 रुपये प्रति टन नीचे आ चुके हैं। निर्यात मोर्चे पर, भारतीय बंदरगाहों से अधिकांश स्टीमर शिपमेंट के लिए रवाना हो चुके हैं और नए स्टीमर को बर्थ मिलने में देरी हो रही है, क्योंकि चावल व अन्य खाद्यान्न की लोडिंग जारी है। इससे निर्यात मांग में अस्थायी सुस्ती आई और डीओसी के भाव दबाव में आए। हालांकि शाम के सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से पूछताछ बढ़ने लगी है, जिससे बाजार में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। देश में सोयाबीन का उत्पादन इस वर्ष अनुमानित 100-102 लाख मीट्रिक टन रहा है, जो पिछले वर्षों के 128-130 लाख मीट्रिक टन से कम है। कम उत्पादन के कारण किसानों के पास स्टॉक सीमित है और अधिकांश माल स्टॉकिस्टों एवं सॉल्वेंट प्लांटों के पास पहुंच चुका है। खाद्य तेलों में भी इंदौर, इटारसी, नागपुर और औरंगाबाद जैसे प्रमुख केंद्रों पर व्यापार पहले ही काफी हो चुका है, जिससे फिलहाल मांग कुछ धीमी पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों में बिकवाली जरूर बढ़ी है, लेकिन बड़े स्तर पर सौदे नहीं हुए हैं और अब वहां भी भाव सुधरने लगे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए बाजार में मौजूदा गिरावट को करेक्शन माना जा रहा है और आगे फिर से तेजी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान भावों पर सोयाबीन और डीओसी में खरीदारी की जा सकती है। खाद्य तेलों में भी 1-2 रुपये प्रति किलो से अधिक गिरावट की संभावना कम है।