मक्का बाजार में स्थिरता, निर्यात मांग से कीमतों को सहारा
मक्का बाजार अपने निचले स्तरों से उबरते हुए स्थिर होने के संकेत दे रहा है। बांग्लादेश में चुनावों के बाद निर्यात मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में तेजी आई है। खरीदार पहले की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, जबकि विक्रेता अभी भी सतर्क हैं। सोमवार को गुलाबबाग मंडी में मक्का का भाव ₹1,900 प्रति क्विंटल पर पहुंच गया, जो पहले के मुकाबले ₹50 की बढ़ोतरी है। वहीं, दिल्ली में ₹2,120, छिंदवाड़ा में ₹1,600, इंदौर के तिरुपति स्टार्च प्लांट पर ₹1,700 और सांगली में ₹1,850 प्रति क्विंटल के भाव दर्ज किए गए। हिली बॉर्डर पर मक्का ₹2,000 प्रति क्विंटल पर खरीदा जा रहा है। यहां से रेल और ट्रकों के माध्यम से बांग्लादेश को निर्यात जारी है। सीमित खरीफ बुआई और एल-नीनो की आशंका से उत्पादन पर असर की चिंता बनी हुई है। अमेरिका में 2026 के लिए मक्का का रकबा 94 मिलियन एकड़ रहने का अनुमान है, जो 2025 के 98.8 मिलियन एकड़ से कम है। महाराष्ट्र में रबी मक्का की बुआई पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम बताई जा रही है, जिससे बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम है। हालांकि बिहार और पश्चिम बंगाल में मध्य मार्च के बाद नई आवक बढ़ने पर हल्का दबाव बन सकता है। अमेरिका से संभावित DDGS आयात को लेकर भी चिंता है, क्योंकि इससे मक्का की मांग पर असर पड़ सकता है। भारत में कुल पशु-चारा खपत लगभग 500 लाख टन है, जिसमें मक्का की हिस्सेदारी 200 लाख टन है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निचले स्तर और निर्यात मांग से बाजार को सहारा मिला है, लेकिन आने वाले समय में नई आवक और DDGS आयात से कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।