मक्का बाजार दोराहे पर: निर्यात का सहारा, नई फसल का दबाव

मक्का बाजार इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ा है, जहां सकारात्मक और सावधानीपूर्ण दोनों तरह के कारक असर डाल रहे हैं। बांग्लादेश चुनाव के बाद बढ़ी निर्यात मांग ने खासकर बिहार में कीमतों को मजबूती दी है। वहीं, नई फसल की आवक और अधिक नमी की स्थिति ने व्यापार में कुछ अनिश्चितता पैदा कर दी है। मंगलवार को प्रमुख मंडियों में कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। गुलाबबाग मंडी में मक्का के भाव ₹30 बढ़कर ₹1,830 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। जोधपुर में सबसे अधिक ₹1,870 प्रति क्विंटल का भाव रहा, जबकि सांगली प्लांट में ₹1,800 का स्तर दर्ज किया गया। इंदौर के तिरुपति प्लांट में ₹1,690, देवास में ₹1,700, छिंदवाड़ा में ₹1,600 और अशोकनगर में ₹1,500 प्रति क्विंटल के भाव रहे। बाजार में खरीदार निचले स्तर पर सक्रिय हैं, जबकि बिकवाली सीमित बनी हुई है। अनुमान है कि बिहार में वर्तमान में लगभग 4.5 लाख टन मक्का का स्टॉक उपलब्ध है। पहले मार्च-अप्रैल के लिए करीब 1 लाख टन निर्यात का अनुमान था, जिसे अब बढ़ाकर 1.50-1.75 लाख टन कर दिया गया है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो मई की शुरुआत तक कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक घटकर करीब 1 लाख टन रह सकता है। दूसरी ओर, नई फसल के बेहतर अवसरों की उम्मीद में स्टॉकिस्ट धीरे-धीरे अपना माल निकाल रहे हैं, क्योंकि अप्रैल से आवक बढ़ने की संभावना है। मध्य भारत की खरगोन मंडी में नई मक्का की सीमित आवक शुरू हो गई है और इसका भाव लगभग ₹1,200 प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि पुराना स्टॉक ₹1,560 प्रति क्विंटल पर स्थिर है। मंडी में करीब 20-25 गाड़ियां पुरानी मक्का की और 5-7 गाड़ियां नई मक्का की पहुंची हैं। हालांकि, नई फसल में 30-35 प्रतिशत नमी होने के कारण खरीदार कटौती के साथ खरीद कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार बाजार फिलहाल गुणवत्ता आधारित और आपूर्ति संवेदनशील चरण में है। अधिक नमी वाली नई मक्का में ₹50 प्रति क्विंटल तक की और गिरावट संभव है। हालांकि, फीड निर्माताओं और स्थानीय खरीदारों की निचले स्तर पर बनी मांग बाजार को बड़े गिरावट से बचा रही है। इसके अलावा, चावल की तुलना में मक्का सस्ता होने से एथेनॉल सेक्टर की मांग भी बढ़ रही है। एथेनॉल कंपनियां लगभग ₹1,700 प्रति क्विंटल की दर से मक्का की खरीद कर रही हैं, जबकि सरकार द्वारा टूटे चावल का निपटान मूल्य करीब ₹2,370 प्रति क्विंटल है। कुल मिलाकर, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर कीमतें भले स्थिर दिख रही हों, लेकिन यह स्थिरता लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। जब तक औद्योगिक मांग और निर्यात में ठोस सुधार नहीं होता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।

Insert title here