भारी आवक से जीरा बाजार दबाव में, प्रीमियम क्वालिटी के भाव मजबूत

पिछले सप्ताह जीरा बाजार में कमजोरी का रुख जारी रहा। गिरावट मुख्य रूप से नए माल में देखने को मिली, जबकि पुराने प्रीमियम क्वालिटी के दाम अब भी ऊंचे स्तर पर टिके हुए हैं। गुजरात की मंडियों में नई फसल की आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है और ऊंझा मंडी में रोजाना करीब 13,000 बोरी की आमद दर्ज की जा रही है, जिससे स्पॉट बाजार पर दबाव बना हुआ है। इस सप्ताह नए जीरे के भाव में ₹200-300 प्रति क्विंटल की गिरावट आई। ऊंझा में शनिवार को हल्का जीरा ₹19,200, मीडियम ₹20,500, बेस्ट ₹22,500 और एक्स्ट्रा क्वालिटी ₹26,000 प्रति क्विंटल पर रहा। राजकोट में 0.1% UK Bolt ₹24,250, Europe Sortex ₹23,125 और Europe Machine ₹22,750 प्रति क्विंटल के स्तर पर कोटेशन दर्ज किए गए। अन्य प्रमुख मंडियों में जैसलमेर ₹20,500, गोंडल ₹22,000 और नागौर ₹21,500 प्रति क्विंटल पर कारोबार हुआ। फ्यूचर्स मार्केट में भी नरमी रही। शनिवार को मार्च कॉन्ट्रैक्ट ₹465 टूटकर बंद हुआ, जबकि अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में ₹420 की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सत्र के दौरान बीच-बीच में हल्की रिकवरी के संकेत भी दिखाई दिए। बाजार की धारणा फिलहाल नरम बनी हुई है, क्योंकि मार्च में राजस्थान की मंडियों में भी नई फसल की आवक शुरू होने की संभावना है, जिससे सप्लाई और बढ़ेगी। उत्पादन के अनुमान के अनुसार वर्ष 2026 में कुल उत्पादन 93,29,616 बोरी रहने का अनुमान है, जो 2025 के 97,93,917 बोरी से करीब 4,64,301 बोरी कम है। गुजरात में उत्पादन घटकर 33,42,038 बोरी रहने का अनुमान है, जबकि राजस्थान में यह बढ़कर 59,87,578 बोरी तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर फसल करीब 5 लाख बोरी कम आंकी गई है। इसके बावजूद, पिछले वर्ष निर्यात में कमजोरी के कारण कैरीओवर स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। 2024 में निर्यात 43 लाख बोरी था, जो 2025 में घटकर 38 लाख बोरी रह गया, यानी करीब 12% की कमी। कम बुवाई क्षेत्र के बावजूद बाजार को तत्काल सपोर्ट न मिलने की यही प्रमुख वजह है। तकनीकी रूप से ₹18,800-19,200 प्रति क्विंटल का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ₹22,500-23,000 के दायरे में मुनाफावसूली की सलाह दी जा रही है। समग्र रूप से देखा जाए तो भारी आवक, पर्याप्त पुराना स्टॉक और सुस्त निर्यात मांग के चलते शॉर्ट टर्म में बड़ी तेजी की संभावना सीमित नजर आती है। हालांकि, प्रीमियम क्वालिटी में मांग टिकाऊ बनी हुई है और यदि निर्यात में सुधार आता है तो कीमतों को नया सहारा मिल सकता है।

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