सीसीआई की बिक्री कीमतों में भारी कटौती से कॉटन बाजार में नरमी
वैश्विक बाजार में कपास की कीमतों में हालिया गिरावट के बीच कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने फसल वर्ष 2025-26 की कॉटन बिक्री कीमतों में 2,500 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की बड़ी कटौती की है। इस फैसले का असर घरेलू हाजिर बाजार पर भी दिखाई दिया, जिससे गुजरात सहित उत्तर भारत के प्रमुख कॉटन व्यापारिक केंद्रों में कीमतों पर दबाव बना। अहमदाबाद में शंकर-6 कॉटन के भाव 150 रुपये घटकर 61,500-62,000 रुपये प्रति कैंडी रह गए। पंजाब में रुई के हाजिर भाव 6,100-6,250 रुपये प्रति मन, हरियाणा में 5,920-5,950 रुपये प्रति मन तथा ऊपरी राजस्थान में 5,950-6,250 रुपये प्रति मन दर्ज किए गए। वहीं निचले राजस्थान में कॉटन के भाव घटकर 56,500-57,500 रुपये प्रति कैंडी रह गए। सोमवार को आयोजित ई-ऑक्शन में सीसीआई ने कुल 28,600 गांठ कॉटन की बिक्री की। इनमें स्पिनिंग मिलों ने 8,500 गांठ जबकि व्यापारियों ने 20,100 गांठ की खरीदारी की। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सीसीआई की मूल्य कटौती से हाजिर बाजार में तत्काल दबाव बना है, जबकि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवक अभी भी सीमित बनी हुई है। व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 1 जून 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त किए जाने से आयात में बढ़ोतरी की संभावना है। इससे घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। हालांकि निजी जिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक बेहद सीमित है, जबकि सीसीआई के पास अभी भी पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में निकट अवधि में घरेलू कॉटन बाजार की दिशा काफी हद तक सीसीआई की बिक्री नीति और मूल्य निर्धारण पर निर्भर रहने की संभावना है। उद्योग जगत ने हाल ही में चालू सीजन के कॉटन उत्पादन अनुमान में 10 लाख गांठ की वृद्धि की है। साथ ही आयात बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है। बावजूद इसके, निजी क्षेत्र के पास सीमित स्टॉक होने से बाजार में बिकवाली का दबाव फिलहाल नियंत्रित बना हुआ है।