होली के पहले बासमती धान बाजार में असामान्य रुझान, कीमतों में उतार-चढ़ाव
March 12, 2025

होली के त्यौहार के नजदीक आते ही, मंडियों में बासमती धान की आवक में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। आमतौर पर होली के समय तक बासमती धान की आवक लगभग खत्म हो जाती है, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में धान की आवक अभी भी जारी है, जो एक असामान्य स्थिति है। इसके विपरीत, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की मंडियों में आवक बहुत सीमित है। पिछले सप्ताह के बाजार विश्लेषण से पता चलता है कि मिलर्स और निर्यातकों की मांग में वृद्धि के कारण धान और चावल की कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि पूरे सप्ताह देखने को मिली, जो बाजार में मजबूत मांग का संकेत देती है। हालांकि, निर्यात मांग में गिरावट आने के कारण अब कीमतें फिर से गिरने लगी हैं। उदाहरण के लिए, हरियाणा की गोहाना मंडी में 1121 धान का भाव 4300 रुपये से घटकर 4270 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच गया है। दिल्ली की नरेला मंडी में धान की आवक में बढ़ोतरी देखी गई है, जहां प्रतिदिन 5-10 हजार बोरियों की आवक हो रही है। इसके परिणामस्वरूप धान की कीमतों में सुधार आया है। 1121 धान का भाव 100 रुपये बढ़कर 4100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि 1509 हाथ का भाव 155 रुपये बढ़कर 2655 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। नजफगढ़ मंडी में सीमित आवक के कारण 50 रुपये की तेजी देखी गई है। अन्य मंडियों जैसे भाटापाड़ा, राजिम, अमृतसर, फाजिल्का, तरनतारन और दनकौर में धान की आवक बहुत कम रही, और वहां कीमतें स्थिर रही। एटा, मैनपुरी, जहांगीराबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, शाहजहांपुर और खैर जैसी मंडियों में कारोबार सामान्य रहा, और यहां विभिन्न किस्मों के धान के दाम में 100-200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी और मंदी दोनों देखी गई। हरियाणा की मंडियों में धान की आपूर्ति में कमी आई है, और तरावड़ी मंडी में धान के भाव स्थिर रहे। मध्य प्रदेश की मंडियों में पीबी और 1886 धान की आवक जारी है, और अच्छी गुणवत्ता वाले पीबी धान का भाव 2600 से 2680 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जबकि 1886 धान का भाव 2900 रुपये तक मिल रहा है। वर्तमान में, भारत के चावल निर्यात में कुछ गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रमजान माह की शुरुआत है। बासमती चावल के निर्यात में भारत को पाकिस्तान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अन्य चावल जैसे गैर-बासमती सफेद और सेला चावल के निर्यात में थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। हालांकि, भारत सरकार ने टूटे चावल (ब्रोकन राइस) के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है, जिससे इस चावल की कीमतों में वृद्धि की संभावना है। साथ ही, 1718 सेला चावल की मांग में भी कुछ सुस्ती के बाद अब तेजी देखने को मिल रही है, और इसकी कीमतें 5200 रुपये से बढ़कर 5550 रुपये तक पहुँच गई हैं।

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