चना बाजार अपडेट

बीते सप्ताह चना दाल और बेसन में मांग बनी रही, जिसके कारण 150-175 रुपए प्रति क्विंटल की साप्ताहिक मजबूती दर्ज की गई। शनिवार को बिकवाली के बावजूद देशी चना बाजार सप्ताह के दौरान मजबूती के साथ बंद होने में सफल रहा। दिल्ली चना में 150 रुपए प्रति क्विंटल का उछाल आया। इंदौर, कटनी, बीकानेर और अन्य प्रमुख बाजारों में भी चना मजबूत रहा। स्टॉकिस्टों की मजबूत खरीदी के कारण चना में तेजी आई। होली अवकाश और MSP से कम भाव होने के कारण मंडियों में चना की आवक कम रही, लेकिन स्टॉकिस्टों की हर भाव में मजबूत खरीदी के कारण चना में तेजी बनी रही। किसानों के पास वर्तमान में बेचने के लिए कई विकल्प हैं, जैसे गेहूं, सरसों, मसूर, मटर आदि, जिसके कारण कम भाव में चना मंडी में कम बिक रहा है। भविष्य में, हमारा मानना है कि चना की आवक अप्रैल में बेहतर रहेगी, जिससे भाव पर दबाव बनने की संभावना है। दिल्ली चना का भाव ₹5600 प्रति क्विंटल है और ₹5300-5400 की रेंज में आए तो खरीदी करना बेहतर रहेगा। मंडी में मिल क्वालिटी चना ₹5100-5200 की रेंज में खरीदी करना उचित रहेगा, क्योंकि सरकारी खरीद बढ़ने पर इससे नीचे भाव जाने की संभावना कम है। शॉर्ट टर्म (15-30 दिन) के लिए चना में सीमित कारोबार करना बेहतर रहेगा। पिछले सप्ताह दिल्ली चना ₹5350 पर निचले स्तर और ₹5700 पर ऊपरी स्तर के बीच रहा। दिल्ली चना में ₹350 बढ़ने के बावजूद दाल में उतनी तेजी नहीं आई। मार्च के अंत के कारण व्यापार और खरीदी 8-10 दिन धीमी रहने की उम्मीद है। चना दाल में ऊपर की ओर ग्राहकी अटकने से मिलर्स की खरीदी रुकी है। इस बीच, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से चना आवक का दबाव अब शुरू होगा। मध्य प्रदेश में बोआई कमजोर जरूर है, लेकिन उत्पादकता बेहतरीन है। राजस्थान में अधिकांश जिलों में उत्पादकता बेहतर बताई जा रही है, और गुजरात में भी चना की फसल 15-20% अधिक निकलने की रिपोर्ट है। इन कारणों से, चना स्टॉक के लिए अप्रैल तक इंतजार करना बेहतर रहेगा। चना आयात की समयसीमा 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है। आयात समयसीमा बढ़ाई जाए या बंद हो, इसका शॉर्ट टर्म बाजार पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में अब लगभग 4 लाख टन चना स्टॉक बचा हुआ है और आयात की लागत ₹6100-6200 के आसपास है। घरेलू उत्पादन और आवक की स्थिति की बात करें तो इस वर्ष देश में चना उत्पादन 80 लाख टन के आसपास रहने की संभावना है (पिछले वर्ष 70 लाख टन)। कर्नाटक और महाराष्ट्र का चना अधिकांश निकल चुका है, जबकि गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से चना का दबाव अप्रैल में बना रहेगा। सरकारी खरीदारी फिलहाल नाफेड द्वारा तेलंगाना में 2969.75 टन हुई है। हमारा मानना है कि कर्नाटक और महाराष्ट्र में खरीदी कमजोर रह सकती है, जबकि गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में चना की खरीदी सामान्य रहने की उम्मीद है।

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