अंतरराष्ट्रीय चावल निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा से बासमती और गैर-बासमती चावल की कीमतों में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय चावल निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय निर्यातकों को अपने चावल के निर्यात मूल्य को घटाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष बासमती चावल का निर्यात मूल्य लगभग 1050 डॉलर प्रति टन था, जो अब घटकर 900-950 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है। इस मूल्य में कमी के कारण मिलर्स और प्रोसेसर्स किसानों से ऊंचे दामों पर धान खरीदने से पीछे हट रहे हैं। गैर-बासमती चावल की कीमतों में भी गिरावट देखी जा रही है। घरेलू मंडियों में मुख्यतः बासमती धान की आवक हो रही है, जहां कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया है। जैसे कि नरेला मंडी में 1509 हैण्ड धान की कीमत 300 रुपए गिरकर 2725 रुपए प्रति क्विंटल हो गई, जबकि 1509 कम्बाइन धान और 1718 धान की कीमतों में क्रमशः 80 रुपए और 50 रुपए की सुधार दर्ज हुई। छत्तीसगढ़ की मंडियों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जैसे भाटापाड़ा मंडी में एचएमटी धान की कीमत 100 रुपए बढ़ी, वहीं श्रीराम धान की कीमत 200 रुपए प्रति क्विंटल घट गई। कुछ राज्यों में रबी कालीन धान की नई फसल की आवक अगले महीने शुरू होने की संभावना है, जिससे कारोबार में सुधार हो सकता है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान की मंडियों में धान की सामान्य आवक जारी है। इसके अलावा, सरकार ने 100% टूटे चावल के निर्यात की अनुमति दी है, लेकिन भारतीय चावल का निर्यात मूल्य पाकिस्तान, वियतनाम और म्यांमार से अधिक होने के कारण प्रतिस्पर्धा में चुनौती बरकरार है। गैर-बासमती सफेद और सेला चावल के निर्यात में भी कठिनाई बनी हुई है। यह स्थिति आने वाले समय में भारतीय चावल निर्यात उद्योग पर गहरा प्रभाव डाल सकती है