ग्वार मार्केट रिपोर्ट

बुवाई रकबा और उत्पादन का रुझान: 2024-25 में ग्वार की बुवाई का क्षेत्रफल 31.50 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 30.89 लाख हेक्टेयर था। राजस्थान में 29.82 लाख हेक्टेयर, जबकि गुजरात में यह घटकर 0.85 लाख हेक्टेयर रह गया है। कुल उत्पादन 20 लाख टन तक पहुंचने की संभावना है, जो पिछले साल के 16.65 लाख टन से अधिक है। औसत उत्पादकता 634.92 किलो/हेक्टेयर अनुमानित है। बेहतर उत्पादन से सप्लाई स्थिर बनी रहेगी, जिससे कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना कम है। बाजार में मांग: हाल ही में ग्वार और इसके बाय-प्रोडक्ट्स (चूरी और कोरमा) की निर्यात मांग में सुधार हुआ है। चूरी के भाव 3100-3200 और कोरमा 3600-3700 प्रति क्विंटल के आसपास हैं। रोजाना 20-25 हजार बोरी की आवक के मुकाबले मांग 30-35 हजार बोरी तक है, जिससे बाजार में तेजी का माहौल है। स्टॉक की स्थिति: अब तक 40-45 लाख बोरी बाजार में आ चुकी हैं, जबकि किसानों के पास लगभग 20-22 लाख बोरी का स्टॉक बचा हुआ है। आने वाले महीनों में आवक घटने की संभावना है, जिससे भाव को समर्थन मिलेगा। हालांकि, उत्पादन अधिक होने के कारण कीमतों में बड़ी उछाल की संभावना नहीं है। निर्यात की स्थिति: अप्रैल-नवंबर 2024 के दौरान ग्वार मील का निर्यात 12% गिरकर 1.39 लाख टन रह गया, जबकि ग्वार गम का निर्यात स्थिर रहा और 2.61 लाख टन तक पहुंचा। प्रमुख निर्यात देश नॉर्वे, जर्मनी, रूस और अमेरिका हैं। आने वाले समय का बाजार रुझान: मार्च महीने की शुरुआत में NCDEX पर ग्वार का भाव 5150 तक गिर गया था, जो घरेलू और निर्यात मांग से बढ़कर 5400 के आसपास पहुंच चुका है। ग्वार गम का वायदा भी 9800 से बढ़कर 10300 पर कारोबार कर रहा है। जोधपुर में ग्वार सीड का भाव 5425 और बीकानेर में 5377 प्रति क्विंटल है। आपूर्ति सीमित और मांग मजबूत बनी हुई है। निर्यात और घरेलू मांग सुधरने से लंबे समय में बाजार में तेजी की संभावना है, हालांकि निकट अवधि में भाव सीमित दायरे में रह सकते हैं। 8000-10000 के रेट मिलना मुश्किल है, क्योंकि ऊंचे भाव पर वैकल्पिक उत्पादों का उपयोग और स्टॉकिस्ट की सप्लाई मांग को कमजोर कर देती है।

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