युद्ध, मौसम और आवक के बीच संतुलित रहा सरसों बाजार
वर्तमान समय में सरसों के बाजार पर कई महत्वपूर्ण कारकों का प्रभाव देखने को मिल रहा है। व्यापारियों, स्टॉकिस्टों और बड़े किसानों के लिए इन परिस्थितियों को समझना आवश्यक है, क्योंकि आने वाले समय में बाजार की दिशा इन्हीं कारकों के आधार पर तय हो सकती है। सबसे पहले, हाल ही में आयोजित सरसों सेमिनार से सामने आए उत्पादन अनुमान बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं। सेमिनार में विभिन्न स्रोतों द्वारा अलग-अलग आंकड़े पेश किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरसों का कुल उत्पादन लगभग 10 मिलियन टन से 12 मिलियन टन (100-120 लाख टन) के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं सरकार ने 2026 के लिए सरसों उत्पादन का अनुमान 13.3 मिलियन टन (133 लाख टन) लगाया है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी तनाव भी सरसों बाजार को प्रभावित कर रहा है। इस संघर्ष के कारण समुद्री शिपिंग गतिविधियों में व्यवधान आया है और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके परिणामस्वरूप आयातित खाद्य तेल महंगे हुए हैं, जिससे घरेलू सरसों बाजार को समर्थन मिला है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि आने वाले समय में युद्धविराम की स्थिति बनती है, तो सरसों के दाम में लगभग ₹200-₹300 की गिरावट संभव है। हालांकि यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो गिरावट सीमित रह सकती है। फिलहाल संकेत मिल रहे हैं कि जयपुर में सरसों का मौसमी निचला स्तर ₹6500 प्रति क्विंटल से नीचे जाने की संभावना कम है। इसी बीच बेमौसम बारिश भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनकर सामने आई है। इस समय सरसों की कटाई का सीजन चल रहा है और कई उत्पादक क्षेत्रों से बारिश तथा ओलावृष्टि की खबरें मिली हैं। इससे एक तरफ उत्पादन प्रभावित हो सकता है और दूसरी ओर कटाई में देरी होने की संभावना है, जो कीमतों को सहारा दे सकती है। मंडियों में सरसों की आवक को भी बाजार की दिशा तय करने वाला प्रमुख कारक माना जा रहा है। आमतौर पर सरसों की सबसे अधिक आवक 15 मार्च से 22 मार्च के बीच देखी जाती है। पिछले सीजन में 20 मार्च को आवक अपने चरम पर थी, जब लगभग 16 लाख बोरी (1.6 मिलियन बैग) की आवक दर्ज की गई थी। अनुमान है कि इस वर्ष भी इसी अवधि में आवक का उच्च स्तर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों के भाव काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि मंडियों में कितने दिनों तक आवक 15 लाख बोरी (1.5 मिलियन बैग) से ऊपर रहती है। यही आंकड़ा कुल उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बाजार का रुख फिलहाल संतुलित दिखाई दे रहा है। यदि स्थितियां इसी प्रकार बनी रहती हैं, तो जयपुर में सरसों के भाव ₹6500 प्रति क्विंटल से नीचे जाने की संभावना कम है। जो व्यापारी या स्टॉकिस्ट खरीदारी करना चाहते हैं, वे 20 मार्च के आसपास इन स्तरों पर स्टॉक बनाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं जिन किसानों के पास बड़ी मात्रा में सरसों का स्टॉक है, वे इस समय कुछ मात्रा बेच सकते हैं क्योंकि निकट भविष्य में बड़ी तेजी की संभावना कम दिखाई दे रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और मौसम से जुड़ी परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। इसलिए बाजार से जुड़े सभी लोगों को सावधानी के साथ व्यापार करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा मौसम संबंधी खबरों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।