मक्का की कीमतों में स्थिरता, आपूर्ति की कमी और बढ़ती मांग से मजबूत रुझान
पिछले 10 दिनों में मक्का की कीमतों में ₹100 से ₹150 तक की वृद्धि हुई है, जो मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग और सीमित आपूर्ति के कारण है। मंगलवार को, प्रमुख मंडियों में कीमतें स्थिर से मजबूत बनी रहीं, जिसमें गुलाबबाग मंडी में ₹25 की बढ़ोतरी के साथ मक्का ₹2,000 प्रति क्विंटल पहुंच गया। विजयवाड़ा में ₹1,640, दिल्ली में ₹2,000, राजकोट में ₹1,650, छिंदवाड़ा में ₹1,870, इंदौर (तिरुपति स्टार्च प्लांट) में ₹1,850, सांगली में ₹1,960 और जयपुर में ₹1,830 प्रति क्विंटल की कीमत रही। बिहार से मक्का की आपूर्ति में देरी (लगभग एक सप्ताह) के कारण आपूर्ति की कमी बनी हुई है, जो कीमतों को ऊंचा बनाए रखे हुए है। बांगलादेश को निर्यात, विशेष रूप से रेल रैक के माध्यम से, घरेलू भंडार को और कम कर रहा है। मुख्य कारण यह है कि बिहार की नई फसल अभी तक बाजार में पूरी तरह से नहीं आई है, जबकि खरीदारों ने मार्च में अधिक आपूर्ति की उम्मीद में अपने स्टॉक कम रखे थे। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसने मक्का की कीमतों को और बढ़ावा दिया है, क्योंकि एथेनॉल कंपनियों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में बाजार में मक्का के विक्रेताओं पर कोई दबाव नहीं है, और खरीदार सक्रिय बने हुए हैं, खासकर पंजाब में, जहां मक्का ₹2,200 प्रति क्विंटल में बिक रहा है। यह स्थिति तब तक बनी रह सकती है, जब तक अप्रैल मध्य तक बिहार से नई फसल की आपूर्ति शुरू नहीं होती। ऐतिहासिक रूप से, मक्का का बाजार घरेलू उत्पादन चक्रों और वैश्विक मांग में बदलाव से प्रभावित होता रहा है। बांगलादेश को निर्यात और बिहार से नई फसल की देर से आपूर्ति ने आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन को और बढ़ा दिया है। यदि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव जारी रहते हैं, तो मक्का की कीमतें आगामी फसल सत्र तक ऊंची बनी रह सकती हैं।