नई फसल आई, गेहूं के दाम गए नीचे!

घरेलू बाजार में गेहूं की बढ़ती आवक का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। नई फसल की लगातार बढ़ती सप्लाई के कारण मंडियों में दामों पर दबाव बन रहा है और कीमतों में दिन-ब-दिन गिरावट देखी जा रही है। बुधवार को भी अधिकांश बाजारों में भाव या तो स्थिर रहे या हल्की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि सप्लाई बढ़ रही है जबकि मांग कमजोर बनी हुई है। गुजरात की मंडियों में रोजाना लगभग 15,000 से 25,000 बोरी की आवक हो रही है, जिससे भाव घटकर ₹2,150–₹2,250 प्रति क्विंटल के आसपास आ गए हैं, जबकि कांडला में डिलीवरी रेट करीब ₹2,325 प्रति क्विंटल पर टिके हुए हैं। उत्तर भारत में भी दबाव साफ दिख रहा है—दिल्ली के लारेंस रोड पर भाव ₹10 गिरकर ₹2,600 प्रति क्विंटल हो गए। समस्तीपुर में ₹2,500, अलीपुर में ₹2,610, दाहोद में ₹2,320, बीकानेर में ₹2,520, इंदौर में ₹2,350 और उज्जैन में ₹2,310 प्रति क्विंटल के भाव दर्ज किए गए। राजस्थान में आगे ₹50 से ₹75 प्रति क्विंटल तक और गिरावट की संभावना जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश में गेहूं करीब ₹2,510 प्रति क्विंटल पर स्थिर बना हुआ है। दक्षिण भारत के बाजार अपेक्षाकृत संतुलित हैं, जहां बेंगलुरु में गेहूं लगभग ₹2,700 प्रति क्विंटल पर बना हुआ है और अप्रैल की फॉरवर्ड डिलीवरी भी इसी स्तर के आसपास बताई जा रही है। पूर्वी भारत में कोलकाता बाजार लगभग ₹2,650 प्रति क्विंटल पर स्थिर है। यहां के व्यापारी बांग्लादेश को निर्यात अनुमति के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अनुमति मिलने पर दामों में सुधार आ सकता है। फिलहाल MSP और मंडी भाव के बीच का अंतर किसानों की बिक्री को कुछ हद तक धीमा कर रहा है, लेकिन अगले 1–2 हफ्तों में आवक और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे गिरावट और तेज हो सकती है। इसके अलावा, LPG सप्लाई से जुड़ी संभावित दिक्कतों के कारण होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर की मांग कमजोर पड़ सकती है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। कुल मिलाकर, बाजार में हल्की खरीदारी तो दिख रही है, लेकिन बड़े स्तर पर आक्रामक स्टॉकिंग अभी नहीं हो रही है। जैसे-जैसे पीक आवक सीजन बढ़ेगा, गेहूं के दाम निकट भविष्य में स्थिर से कमजोर रुख में बने रह सकते हैं।

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