अरहर बाजार में मिश्रित रुख: घरेलू मांग और MSP ने दी सहारा
अरहर के बाजार में इस समय मिश्रित रुख दिखाई दे रहा है। एक तरफ कीमतें लगातार गिर रही हैं, वहीं निचले स्तरों पर मजबूत समर्थन बन रहा है, जिससे आगे बड़ी गिरावट की संभावना कम नजर आ रही है। चेन्नई में लेमन अरहर के अप्रैल-मई शिपमेंट के आयातित भाव 850 डॉलर प्रति टन तक नरम हुए हैं, जबकि पुराने सीजन (2025) के भाव 830 डॉलर प्रति टन के आसपास स्थिर हैं। घरेलू स्तर पर, चेन्नई में लेमन अरहर की कीमतें 50 रुपये गिरकर 7625 रुपये, दिल्ली में 75 रुपये की गिरावट के साथ 7825 रुपये और मुंबई में 100 रुपये टूटकर 7600 रुपये प्रति क्विंटल पर रह गई हैं। देसी अरहर में कटनी, अकोला, रायपुर और लातूर में हल्का सुधार देखा गया, जबकि अन्य जगहों पर भाव स्थिर हैं। आयातित अरहर में, नवा सेवा बंदरगाह पर सफेद अरहर 690-695 डॉलर, गवरी 680-685 डॉलर और अरुणा क्वालिटी 750 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बनी हुई है। सूडान की अरहर 6800 रुपये प्रति क्विंटल और गजरी व सफेद अरहर 6500 रुपये के दायरे में चल रही है। बर्मा की कीमतें तेज होने के कारण आयात महंगा हुआ है, जिससे नीचे भाव पर बिकवाली कम हुई और बाजार को सपोर्ट मिला है। घरेलू मांग फिलहाल सीमित है, लेकिन भविष्य में बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकार ने अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है और चालू सीजन में करीब 2 लाख टन की खरीद भी की जा चुकी है, हालांकि यह कुल उत्पादन के मुकाबले अभी सीमित है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में अधिक बारिश के कारण फसल कमजोर रही है और लगभग 60% माल पहले ही दाल मिलों द्वारा खरीदा जा चुका है। चेन्नई में पहले अधिक कंटेनर आने के कारण बाजार दबकर 7900 रुपये तक गया था, और अब करीब 7500 रुपये के स्तर पर बोली लग रही है। कुल मिलाकर, मौजूदा स्तर पर अरहर में नीचे की संभावना सीमित है और हल्के सुधार की उम्मीद बनी हुई है, खासकर अगर दाल मिलों की खरीद बढ़ती है तो बाजार को और समर्थन मिल सकता है।