बढ़ती आवक से मक्का बाजार पर दबाव, मजबूत मांग से बड़ी गिरावट पर रोक

मक्का बाजार में इस समय मिश्रित रुख देखने को मिल रहा है, जहां एक ओर आवक बढ़ने से ऊपरी स्तर पर दबाव बना हुआ है, वहीं मजबूत मांग बाजार को नीचे गिरने से सहारा दे रही है। पिछले दो दिनों में मौसम साफ रहने और बिहार लाइन से सप्लाई बढ़ने के कारण गुलाबबाग मंडी में मक्का के भाव लगभग ₹10 कमजोर होकर ₹2030 प्रति क्विंटल तक आ गए। यहां दैनिक आवक करीब 4000 टन दर्ज की गई। बिहार के स्टॉक पॉइंट पर भी नरमी देखने को मिली, जहां कीमतें ₹30 घटकर ₹2090 प्रति क्विंटल तक रहीं, जबकि रैक पॉइंट के रेट करीब ₹20 टूटकर ₹1940 तक पहुंचे। अन्य प्रमुख बाजारों में दिल्ली में ₹2200, छिंदवाड़ा में ₹2100, तिरुपति स्टार्च प्लांट इंदौर में ₹2100, देवास में ₹2070 तथा सांगली में ₹2135 प्रति क्विंटल के भाव दर्ज किए गए। फिलहाल बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बिहार और उत्तर प्रदेश की नई फसल की एक साथ बढ़ती आवक से बन रहा है। इस बार दोनों राज्यों की सप्लाई के बीच का अंतर काफी कम हो गया है, जिससे 15 मई से 15 जून के दौरान उत्तर भारत में मक्का की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का कुल उत्पादन करीब 52 लाख टन आंका जा रहा है। इसमें अकेले आंध्र प्रदेश की लगभग 30 लाख टन फसल का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा अभी बाजार में आना बाकी माना जा रहा है। दूसरी ओर बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के चलते उत्पादन अनुमान घटकर करीब 57 लाख टन पर आ गया है और लगभग 5 प्रतिशत फसल नुकसान की चर्चा चल रही है। एथेनॉल उद्योग में भी खरीद रणनीति में बदलाव दिखाई दे रहा है। ऊंचे दामों के कारण कई डिस्टिलरी मक्का की जगह टूटे चावल का उपयोग बढ़ा रही हैं, जिससे इंडस्ट्रियल मांग कुछ सीमित हुई है। इसके अलावा सरकार द्वारा अतिरिक्त 20 लाख टन चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए जारी करने तथा तेलंगाना में करीब 4 लाख टन सरकारी मक्का-ज्वार स्टॉक बाजार में उतारने की संभावना ने भी बाजार को संतुलित बनाए रखा है। हालांकि पोल्ट्री और फीड सेक्टर की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है। पूर्वी भारत में खपत में 7 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है, जहां मासिक आवश्यकता करीब 7.5 लाख टन बताई जा रही है। अच्छी गुणवत्ता वाली मक्का की मांग लगातार मजबूत है और बड़े प्लांट फिलहाल पुराने भावों पर ही खरीद कर रहे हैं। करनाल और जोधपुर डिलीवरी में मक्का ₹2250 प्रति क्विंटल तक बिक रही है। निर्यात बाजार की बात करें तो बांग्लादेश ट्रेड में फिलहाल पेरिटी की समस्या बनी हुई है, लेकिन अगले चार महीनों में रेल और सड़क मार्ग से 5 से 7 लाख टन मक्का निर्यात होने की उम्मीद जताई जा रही है। मंडी मार्केट मीडिया के अनुसार यदि घरेलू बाजार में कीमतों में ₹75 से ₹100 प्रति क्विंटल की और गिरावट आती है तो भारतीय मक्का फिर से निर्यात प्रतिस्पर्धा में आ सकती है। इसी कारण ₹1900 प्रति क्विंटल का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से फिलहाल कोई बड़ा समर्थन नहीं मिल रहा, हालांकि अमेरिकी कॉर्न एक्सपोर्ट पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक चल रहा है। वहीं ब्राजील में चक्रवात और बाढ़ के कारण फसल अनुमान में हल्की कमी आई है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया द्वारा हाल ही में 1.36 लाख टन कॉर्न की खरीद से वैश्विक बाजार को कुछ समर्थन मिला है। कुल मिलाकर मौजूदा समय में बढ़ती आवक के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है, लेकिन मौसम संबंधी जोखिम, बेहतर क्वालिटी की मजबूत मांग और फीड इंडस्ट्री की स्थिर खपत के चलते बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। यदि आने वाले दिनों में बारिश बढ़ती है तो बाजार को फिर से सहारा मिल सकता है। मई महीने में दबाव बने रहने की संभावना है, लेकिन आगे चलकर सुधार की गुंजाइश भी बनी हुई है। व्यापार अपने विवेक से करें।

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