सोयाबीन बाजार में सीमित सुधार, बड़ी तेजी अभी भी दूर
सोयाबीन बाजार में सोमवार को सीमित सुधार देखने को मिला। प्रमुख समर्थन स्तर ₹7,350 टूटने के बाद भाव करीब ₹7,250 तक फिसल गए थे, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी आने से बाजार में रिकवरी दर्ज की गई। इसके बाद सोलापुर में सोयाबीन लगभग ₹7,400 प्रति क्विंटल, जबकि लातूर ₹7,350 तथा नांदेड़ और हिंगोली में करीब ₹7,380 प्रति क्विंटल के भाव पर कारोबार हुआ। हालांकि रिकवरी के बावजूद बाजार का समग्र रुख अभी भी सावधानी भरा बना हुआ है। हाजिर मंडियों में भी दबाव का माहौल कायम रहा। महाराष्ट्र में सोयाबीन के भाव ₹6,800 से ₹6,850 प्रति क्विंटल के दायरे में रहे, जबकि मध्य प्रदेश में कीमतें ₹6,700 से ₹6,900 प्रति क्विंटल के बीच कारोबार करती रहीं। इंदौर में भाव ₹100 घटकर ₹6,900 और वाशिम में ₹200 की गिरावट के साथ ₹6,800 प्रति क्विंटल दर्ज किए गए। इससे स्पष्ट है कि घरेलू मांग अभी बाजार को मजबूत सहारा नहीं दे पा रही है। प्रोसेसिंग प्लांटों की खरीद कीमतों में मिश्रित रुख देखने को मिला। प्रेस्टिज प्लांट ने अपने खरीद भाव ₹125 बढ़ाकर ₹7,000 प्रति क्विंटल कर दिए, जबकि धनका और डीसान प्लांट ने भी मामूली बढ़ोतरी की। दूसरी ओर एवीएस ने अपने खरीद भाव ₹7,000 प्रति क्विंटल पर स्थिर रखे, जिससे संकेत मिलता है कि मिलर्स की खरीद फिलहाल सीमित बनी हुई है। खाद्य तेल बाजार में भी हल्का सुधार देखने को मिला। कांडला में सोया तेल ₹1,415, मुंबई में ₹1,460 और हल्दिया में ₹1,425 प्रति 10 किलोग्राम पर कारोबार हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीबीओटी जुलाई सोया ऑयल वायदा 0.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ 71.30 सेंट प्रति पाउंड पर बंद हुआ, जबकि मलेशियाई पाम ऑयल वायदा 4,636 से गिरकर 4,536 रिंगिट पर आ गया। वैश्विक खाद्य तेल बाजार का रुख फिलहाल मिश्रित बना हुआ है। सोया डीओसी बाजार में भी दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। डीसान धुलिया में डीओसी के भाव ₹500 बढ़कर ₹59,500 प्रति टन हो गए, जबकि ओमश्री धुलिया में समान स्तर पर ₹500 की गिरावट दर्ज की गई। धनराज लातूर में भाव ₹57,500 प्रति टन पर स्थिर रहे। इससे संकेत मिलता है कि निर्यात और पशु आहार उद्योग से मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। मौलिक कारकों की बात करें तो घरेलू स्तर पर कम स्टॉक बाजार को कुछ सहारा दे रहे हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति और नई फसल के नजदीक आने से बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है। मई के अंत तक देश में सोयाबीन का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13.8 प्रतिशत कम रहा, जबकि आयात और क्रशिंग गतिविधियों में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार को मजबूत तेजी का आधार नहीं मिल पा रहा है। बुवाई की स्थिति भी बाजार के लिए अहम बनी हुई है। 19 जून तक देश में केवल 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हुई थी, जो सामान्य से काफी कम है। हालांकि अगले 7 से 10 दिनों में अच्छी बारिश होने पर बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। यदि बुवाई रफ्तार पकड़ती है तो नई फसल को लेकर सकारात्मक अनुमान बन सकते हैं, जिससे आगे चलकर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव भी बाजार की नजर में बना हुआ है। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसका सकारात्मक असर सोया तेल और सोयाबीन की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। तकनीकी दृष्टि से ₹7,350 का स्तर निकटतम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ₹7,750 प्रमुख रेजिस्टेंस बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल हर उछाल पर मुनाफावसूली की रणनीति बेहतर रहेगी। नई खरीदारी में जल्दबाजी से बचना चाहिए और ₹7,200 के स्तर पर विशेष नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि इसके नीचे कमजोरी और बढ़ सकती है।