सीजन के उच्चतम स्तर पर पहुंची सरसों, अभी ₹200–300 प्रति क्विंटल और तेजी की संभावना
किसान और व्यापारिक वर्ग के लिए सरसों बाजार इस सप्ताह बेहद मजबूत रहा। प्रमुख मंडियों में सरसों के दाम 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक उछले, जिससे बाजार इस सीजन के सर्वोच्च स्तरों पर पहुंच गया। जयपुर मंडी में सरसों का भाव 275 रुपये बढ़कर 8300 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। भरतपुर मंडी में 150 रुपये की तेजी के साथ भाव 7825 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि सुमेरपुर मंडी में 350 रुपये की बढ़त के बाद कीमत 8400 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। प्रोसेसिंग प्लांटों की खरीद कीमतों में भी उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली। सलोनी प्लांट ने इस सप्ताह विभिन्न केंद्रों पर 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की। इसके बाद शमसाबाद (आगरा) में भाव 9125 रुपये, डिग्नेर (आगरा) में 9135 रुपये, अलवर में 9050 रुपये, मुरैना में 9100 रुपये तथा कोटा में 9050 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। गोयल कोटा प्लांट ने भी 250 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए खरीद भाव 8250 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शनिवार को ऊंचे स्तरों पर हल्का करेक्शन देखने को मिला, लेकिन बाजार का समग्र रुख मजबूती वाला बना रहा। सरसों के साथ-साथ सरसों तेल बाजार में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। इस सप्ताह तेल की कीमतों में लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ और भाव पिछले पांच वर्षों के उच्चतम स्तरों के करीब पहुंच गए। अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार की मजबूती तथा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी घरेलू बाजार को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया। जयपुर कच्ची घानी का भाव पहले से निर्धारित 1650 रुपये के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार अब 1700 रुपये का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर मजबूती बनाए रखने में सफल रहता है, तो इसके बाद 1800 रुपये तक कोई बड़ी तकनीकी बाधा दिखाई नहीं देती। बाजार में जारी तेजी के पीछे कई मजबूत बुनियादी कारण मौजूद हैं। सोयाबीन की सीमित उपलब्धता, सरसों तेल और सरसों खल की मजबूत मांग तथा सोयाबीन बाजार की तेजी का सकारात्मक प्रभाव सरसों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसके अलावा देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक घटकर 3 लाख बोरी से नीचे आ जाने के कारण उपलब्धता सीमित बनी हुई है। आगामी त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए तेल मिलें लगातार स्टॉक बढ़ाने में जुटी हैं, जिससे खरीदारी का दबाव बना हुआ है। मिलों की सक्रिय खरीद, कम आवक और तेल व खल बाजार की मजबूती को देखते हुए निकट भविष्य में भी सरसों बाजार को समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है। यदि मौजूदा बुनियादी परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता और वैश्विक खाद्य तेल बाजार मजबूत बना रहता है, तो सरसों में अभी भी 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक अतिरिक्त तेजी की संभावना बनी हुई है। हालांकि ऊंचे भावों पर समय-समय पर मुनाफावसूली के कारण हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन व्यापक दृष्टिकोण से बाजार का रुझान फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों में सरसों बाजार के मूलभूत संकेतक मजबूत हैं। सीमित आवक, तेल मिलों की लगातार खरीद, खाद्य तेलों में मजबूती और त्योहारी मांग की संभावनाएं बाजार को सहारा दे रही हैं। ऐसे में जिन किसानों और व्यापारियों के पास स्टॉक उपलब्ध है, वे जल्दबाजी में बिक्री करने के बजाय बाजार की चाल पर नजर बनाए रख सकते हैं। वहीं, यदि अल्पकालिक गिरावट आती है तो उसे खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।