मक्का बाजार में मजबूती बरकरार, कमजोर आवक और औद्योगिक मांग से भावों को समर्थन

भारतीय मक्का बाजार में इस समय मजबूती का रुख बना हुआ है। बाजार को कमजोर आवक, एथेनॉल, पोल्ट्री और स्टार्च उद्योगों की लगातार बढ़ती मांग तथा कई राज्यों में मानसून की धीमी प्रगति से समर्थन मिल रहा है। सीमित उपलब्धता के बीच उद्योगों की सक्रिय खरीदारी से विभिन्न राज्यों की मंडियों में भाव मजबूत बने हुए हैं। महाराष्ट्र में पोल्ट्री और प्रीमियम फीड निर्माताओं की मजबूत खरीद के चलते सांगली मंडी में मक्का के भाव ₹2,525-2,660 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। वहीं कोल्हापुर प्रीमियम में ₹2,690, मुदखा में ₹2,575 और बारामती एग्रो में ₹2,550 प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार दर्ज किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में स्टार्च उद्योगों की बढ़ती मांग ने बाजार को अतिरिक्त मजबूती दी है। इंदौर स्थित त्रिपति स्टार्च ने खरीद भाव ₹105 बढ़ाकर ₹2,425 प्रति क्विंटल कर दिए हैं। इसके अलावा जिरकॉन अगरमालवा ₹2,355 तथा छिंदवाड़ा क्षेत्र में ₹2,350-2,420 प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद जारी है। उत्तर प्रदेश में किसानों और व्यापारियों के पास सीमित स्टॉक बचा होने से आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। अनुमान के अनुसार किसानों के पास केवल लगभग 10% और व्यापारियों के पास करीब 25% स्टॉक शेष है। इसी स्थिति को देखते हुए सीतापुर स्थित रीफको ने खरीद भाव ₹150 बढ़ाकर ₹2,300 प्रति क्विंटल कर दिए हैं। अन्य प्रमुख बाजारों की बात करें तो बिहार के पूर्णिया क्षेत्र में मक्का ₹2,200-2,280 प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है, जबकि गुजरात के दाहोद में हाईब्रिड मक्का के भाव ₹2,450 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके हैं। वैश्विक बाजार से भी घरेलू कीमतों को समर्थन मिल रहा है। ब्राजील में एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का की बढ़ती खपत और अमेरिका के कमजोर यूएसडीए आंकड़ों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत में मजबूत औद्योगिक मांग और सीमित उपलब्धता के कारण घरेलू बाजार में तेजी का माहौल कायम है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून में अपेक्षित सुधार नहीं होता और एथेनॉल, पोल्ट्री तथा स्टार्च उद्योगों की खरीदारी इसी तरह बनी रहती है, तो अगस्त-सितंबर के दौरान मक्का के भाव में ₹75-100 प्रति क्विंटल तक की अतिरिक्त तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, यदि व्यापक और अच्छी वर्षा होती है तथा नई फसल की संभावनाएं बेहतर होती हैं, तो ऊंचे भावों पर सीमित मुनाफावसूली का दबाव भी बन सकता है। निष्कर्ष: वर्तमान बाजार परिस्थितियों को देखते हुए मक्का का रुख फिलहाल सकारात्मक और मजबूत बना हुआ है। सीमित आवक, औद्योगिक मांग और मौसम की अनिश्चितता निकट अवधि में बाजार को समर्थन देती दिखाई दे रही है।

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