भारत का सफेद सोना कपास: उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत करने पर सरकार का फोकस
भारत वैश्विक कपास उद्योग में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। सरकार द्वारा जारी ताजा फैक्टशीट के अनुसार, कपास की खेती के क्षेत्रफल के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि उत्पादन और खपत दोनों में दूसरा सबसे बड़ा देश है। वैश्विक फाइबर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, विपणन वर्ष 2025-26 में देश का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुंचने की संभावना है। सरकार ने बताया कि कपास क्षेत्र में उत्पादकता, गुणवत्ता, बाजार तक पहुंच और मूल्यवर्धन बढ़ाने के लिए कई नई पहल की जा रही हैं। किसानों को कीमतों में गिरावट के समय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की जाती है। वहीं, मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी के तहत वर्ष 2031 तक कपास उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ करने का लक्ष्य रखा गया है। तकनीकी प्रदर्शन, डिजिटल खरीद प्रणाली और ट्रेसेबिलिटी जैसी आधुनिक पहल के जरिए कपास की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से भारतीय कपास की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूत होगी। कपास को देश में सफेद सोना कहा जाता है क्योंकि यह लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में देश में करीब 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है। वहीं, प्रोसेसिंग, व्यापार और टेक्सटाइल वैल्यू चेन से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से 4 से 5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। निर्यात के मोर्चे पर भी कपास भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 18 लाख गांठ कपास का निर्यात किया, जो वैश्विक कपास निर्यात का करीब 3.37 प्रतिशत रहा। इसी अवधि में कपास निर्यात का कुल मूल्य 11.49 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया। भारतीय कॉटन टेक्सटाइल और मेड-अप उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका रहा, जिसकी कुल निर्यात में 26.35 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात भी भारतीय कपास उत्पादों के प्रमुख आयातक रहे। देश में कपास की खेती मुख्य रूप से नौ राज्यों में की जाती है, जिन्हें उत्तरी, मध्य और दक्षिणी कृषि-जलवायु क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। इसके अलावा ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है।