दलहन रिपोर्ट

देसी चना - देसी चने में इस समय चौतरफा घबराहट का माहौल बना हुआ है। महाराष्ट्र के अकोला लाइन का चना जलगांव की दाल मिलें मंदे भाव में पकड़ रही हैं। इधर ग्वालियर लाइन का चना इंदौर भोपाल लाइन की दाल मिलें ले रही हैं। कुछ कानपुर वाली मिलों को भी इसमें पड़ता लग रहा है। एमपी की दाल, बिहार- बंगाल के लिए सस्ता पड़ने से जा रही हैं। यही कारण है कि दिल्ली में आवक घटने के बावजूद भी राजस्थानी चना 4850/4875 रुपए का बिक रहा है। अब धीरे-धीरे स्टॉक का माल निकल जाएगा, उसके बाद ही आगे चलकर बाजार तेज होगा। काबली चना : इस बार गर्मी वाली शादियां शहरी क्षेत्रों में कम हो रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हो रही हैं। यही कारण है कि काबुली चने की खपत अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। हम मानते हैं कि काबली चने का उत्पादन देश में 5 लाख मीट्रिक टन घटकर 15 लाख मीट्रिक टन हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से भी आयात सौदे मंदे भाव के नहीं हो रहे हैं तथा आयातक इस बार रूचि कम ले रहे हैं, इसे देखते हुए अभी कुछ दिन ठहरने के बाद काबली चने में तेजी आएगी। मसूर : मसूर का उत्पादन सामान्य की अपेक्षा 4 लाख मीट्रिक टन तक घटकर 11 लाख मैट्रिक टन रह जाने का अनुमान है और उत्पादन गत वर्ष 15 लाख मीट्रिक टन हुआ था। यही कारण है कि आयात पड़ता महंगा होते ही मंडियों में देसी माल की आपूर्ति घट गई है। आयात करने पर आज की तारीख में कनाडा का माल 7400 रुपए दिल्ली आकर पड़ रहा है, इस वजह से देसी माल में मिल वालों की लिवाली बढ़ गई है। फलत: बिल्टी में मसूर 7100/7125 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है तथा इसी लाइन पर बाजार अभी और बढ़ने के आसार बन गए हैं। उड़द : यद्यपि उड़द की फसल आंध्र प्रदेश-कर्नाटक में आ रही है, लेकिन वह माल वही की लोकल मिलों में खपने लगा है। दूसरी ओर बर्मा में दो दिनों में 20-25 डॉलर प्रति टन तेजी आ गई है। दूसरी ओर चेन्नई में भी पुराना माल ज्यादा नहीं है तथा आने वाले कंटेनर पहले ही बिके हुए हैं। इसके अलावा नई फसल आने में अभी लंबा समय बाकी है, उससे पहले तेजी का यू-टर्न ले लेगा। मूंग : राजस्थान महाराष्ट्र की मूंग लगभग समाप्त हो गई है, लेकिन गुजरात के मूंग पड़ते में आने लगी है। मध्य प्रदेश-यूपी के सीमावर्ती मंडियों में भी अगेती फसल आने लगी है। बिहार एवं यूपी में भी फसल बहुत बढ़िया है, झारखंड में भी फसल बढ़िया है। दूसरी ओर दाल छिलका एवं धोया की बिक्री अनुकूल नहीं है, इन परिस्थितियों में मूंग के भाव अभी और घटने वाले हैं। दूसरी ओर रुपए की तंगी होने से स्टॉकिस्ट में मैदान में नहीं आ रहे हैं, जो आगे भरपूर मंदे का संकेत दे रहा है। तुवर : तुवर दाल की बिक्री कमजोर होने से उत्पादक मंडियों से यहां तुवर सस्ती बिक रही है, लेकिन रंगून में लेमन तुवर के भाव मजबूत बोलने लगे हैं, चेन्नई में कोई ज्यादा माल नहीं है। दूसरी कोई घरेलू फसल आने वाली नहीं है। चैत्र माह की तुवर कटनी की दाल मिलें मंदे भाव में झपट गई हैं। किसानों के पास रबी सीजन की दूसरी तुवर ज्यादा नहीं बची है, इसे देखते हुए तुवर के भाव न वाले लग रहे हैं। मटर : मटर के भाव उत्पादक मंडियों में 4000/4100 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे हैं। देश में इसका उत्पादन गत वर्ष की अपेक्षा 2 गुना जरूर हुआ है, लेकिन यह भी नहीं भूलना है कि सकल उत्पादन, घरेलू खपत की तुलना में 40 प्रतिशत ही हमारा हुआ है। अत: 60 प्रतिशत खपत के लिए विदेशी मटर की आवश्यकता होगी, उधर मटर पर सरकार द्वारा आयात हेतु प्रतिबंध लगाया गया है। अत: दूरगामी परिणाम तेजी का ही रहने वाला है।

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